=> ना मैं पुरुष हूँ।ना मैं स्त्री हूँ।ना मैं हिंदू हूँ।ना मैं मुसलमान हूँ।ना मैं इसाई हूँ,ना मैं किसी का बेटा हूँ। ना कोई मेरा बाप है , ना मेरा कोई रिस्तेदार है। ना मेरा कोई धर्म है। ना मेरा कोई पंथ है।ना मेरा कोई संप्रदाय है। ना मैं शरीर।ना मेरा शरीर है। ना मैं आया हूँ,ना मैं जाऊँगा।ना मेरा लोक है , ना मेरा परलोक है। ना मैं मानव हूँ, ना मैं दानव हूँ। ना मैं कोई देव हूँ , ना मेरी उत्पति है। ना मेरी स्थिति है। ना मेरा लय है। ना मेरा कोई गुरु है। ना मैं किसी का चेला हूँ। ना जिया हूँ, ना मैं मरूँगा। ना मैं द्रष्टा हूँ,ना मैं साक्षी हूँ। ना मैं धता हूँ,ना मैं ज्ञाता हूँ। ना मैं स्त्रष्टा हूँ। ना मैं अल्पज्ञ हूँ। ना मैं सर्वज्ञ हूँ। ना मैं शब्द हूँ,ना मैं बानी हूँ, ना मैं ओमकार हूँ,ना मैं प्रेरक हूँ। ना मैं ज्योति हूँ,ना मैं ध्यानी हूँ। ना मैं त्यागी हूँ,ना मैं भोगी हूँ। ना मैं वैरागी हूँ।ना मैं संन्यासी हूँ। ना मैं हंस हूँ,ना मैं परमहंस हूँ। ना मैं पुरुषोतम हूँ। ना मैं ज्ञानी हूँ,न मैं विज्ञानी हूँ, ना मैं भौतिक हूँ,इन विशेषणों से मैं पर हूँ।
मुझे मत पूछो,मैं क्या हूँ ?
उतर : हमारा एक है बस मैं ही मैं हूँ।
अनुभव हमार होता नहीं है।
उतर : हमारा एक है। बस मै ही मैं हूँ।
क्या ढूँढूँ मैं आपको,कहीं ना मिलूँगा मैं।
मिलना बिछडना सब फोक है। बस मैं ही मैं हूँ।
सवाल वो करता है,जो खुद को ना पाया।
उतर : उसे कहते सवाल, बच ना पाया।
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: