=>> प्रिय आत्मन,मैंने एक कहानी सुनी है वो आपके सामने रखता है। गौर से पढ़ना एक फ़क़ीर बार बार एक ही बात करता था। ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या। फ़क़ीर की बात लोगो को जचती नहीं थी। क्योकि सब अपनी धारणा में बध्ध थे। ये बात बादशाह तक,पहुच गई। बादशाह ने फ़क़ीर को अपने दरबार में बुलाया। बादशाह भी फ़क़ीर की बातो से सहमत नहीं था। फ़क़ीर को सवाल किया। जगत सत्य है। या मिथ्या ? फ़क़ीर ने बोलो जगत मिथ्या है। दो तिन बार दोहराया सवाल लेकिन फ़क़ीर एक ही उत्तर दे रहा था।की जगत मिथ्या है बादशाह ने फरमान किया की इस फ़क़ीर को मृत्युदंड दिया जाय। हाथी के पैरो तले कुचल दो। दरबार के अन्दर हाथी लाया गया।फिर से बादशाह ने बोल की जगत सत्य है ऐसा बोल दे। अभी तू मुक्त हो सकता है। ये आखरी मौक़ा है। फ़क़ीर अपनी बात पर अडिग रहा। जगत मिथ्या है बादशाह ने महावत को इशारा किया। हाथी को छोड़ दिया जाय हाथि ने अपनी सूंढ़ में फ़क़ीर को पकड़कर जोर से पटक दिया। फ़क़ीर की सभी हड्डियाँ टूट गई वो चिल्ला ने लगा।रोने लगा फिर बादशाह ने फकिर से पूछा की एक मौक़ा और दिया। जायेगा की जगत सत्य है ऐसा बोल दे। मुक्त हो सकते है। फ़क़ीर बोला की हूँ हे बादशाह तेरा ये राज मिथ्या है, मुझे पटक दिया वो भी मिथ्या है, मेरी हड्डियाँ टूट गई वो भी मिथ्या है और मेरे रोने की चीख आप का सुनाई पड़ती है वो भी मिथ्या है। मेरी मौत हो जायेगी ये आप का मानना भी मिथ्या है। वे सुनकर बादशाह ने फ़क़ीर को मृत्युदंड दे दिया। ये कहानी फ़क़ीर और बादशाह के बीच सिमित नहीं है।हम सबकी है, अब भी ऐसे फ़क़ीर मौजूद है और मुर्ख बादशाह भी मौजूद है,ऐसी आवाज इशुर्न उठाई क्या मिला ? वध स्तंभ पर लटका दिया। सजाये मौत ऐसी आवाज सोक्रेटिस ने उठाई क्या मिला ? जहर दिया गया। मीरा को जहर दिया महमद को चैन से जीने नहीं दिया आज भी ऐसा संत फकीरों को साथ ऐसा सुलूक किया जाता है। क्योकि पागालोकी भीड़ बहुत है। मजेकी बात ये है की जिसने फ़क़ीर और संत को मृत्युदंड दिया। वो सब पागल मिलकर इशु की चर्च खड़ी करके पूजा प्रार्थना कर रहे है। पूरी जिंदगी कृष्ण को चैन से बैठ न दिया। आज उसके हजारो मंदिर खड़े कर दिये है। और सारे पागल मिलकर वहाँ शिर टेकते है सबने भगवान का स्वीकार कर लिया। संत फ़क़ीर की पूजा की जाय अगर अपमानित या मृत्युदंड दिया जाय, उससे कोई फर्क पड़नेवाला नहीं है। वो अपने सिध्धांत पर अडिग है। मेरा वक्तव्य पढ़कर आप को सही लेंगे या गलत वो भी मिथ्या है मैंने लिखा है वो भी मिथ्या है आप पढ़ रहे है वो भी मिथ्या है। आगे लिखा गया था ।वो भी मिथ्या है, बाद में लिखेंगे वो भी मिथ्या है। मिथ्या का अर्थ असत है। ऐसा नहीं है, क्योकि संत फ़क़ीर को सुनकर तुम सदगुरु तक पहुच पाते है। और ग्रंथ पंथ को सत्य भी नहीं कह सकते क्योकि सब के घर पे कुरान बाइबल गीता धर्मग्रंथ और दर्शन शाश्त्र है। लेकिन ग्रंथ पढने से आप को रहस्य पाना दुर्लभ है। स्वीकार और अस्वीकार करना दोनु भाव मिथ्या है। जब तक तुम्हे अपना स्वरूप का पता न लग जाय तक मिथ्या का सूत्र समजना कठिन है। जगत मिथ्या है। इस सूत्र के आधार पर तुम नि:संशय हो सकते है। संत फ़क़ीर को समजने के लिए तुम्हे संत पद को पाना होगा। सत का अभाव नहीं और मिथ्या का अस्तित्व नहीं है, सत तूम हो।
=>>अगर फ़क़ीर मौन हो जाय जगत मिथ्या है ऐसा न बोलने पर मृत्युदंड नहीं मिलता लेकिन जिसने रहस्य को पा लिया वो भला कैसे चुप रह सकता है। वो तो फ़क़ीर का स्वभाव बन गया।वो उसके बस की बात नहीं है। भीतरी आवाज को रोक न शका ऐसी कोई सत्ता अब तक खड़ी हुई ही नहीं सत्य में बहुत ताकत होती है। फ़क़ीर की असली आवाज हजारो फ़क़ीर पैदा कर सकती है।
=>>अगर फ़क़ीर मौन हो जाय जगत मिथ्या है ऐसा न बोलने पर मृत्युदंड नहीं मिलता लेकिन जिसने रहस्य को पा लिया वो भला कैसे चुप रह सकता है। वो तो फ़क़ीर का स्वभाव बन गया।वो उसके बस की बात नहीं है। भीतरी आवाज को रोक न शका ऐसी कोई सत्ता अब तक खड़ी हुई ही नहीं सत्य में बहुत ताकत होती है। फ़क़ीर की असली आवाज हजारो फ़क़ीर पैदा कर सकती है।